Sunday, 30 April 2017

घड़ी भी बदल सकती है आपका बुरा समय

क्या आपने कभी सोचा है कि दीवार पर टंगी घंड़ियां भी आपके घर में सुख-समृद्धि का कारण बन सकती है| वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार घड़ी की सूईयां एवं पेंडुलम से सकारात्मक उर्जा का संचार होता है. घर में कभी भी बंद घड़ी नहीं रखनी चाहिए बंद घडी से घर की उन्नति रुक जाती है. चलती हुई घडी निरन्तर विकास का प्रतीक होती है. घरों में लगाई जाने जाने वाली घड़िया हमारे जीवन में महत्तवपूर्ण रोल निभाती है |ज्योतिष और वास्तु की बात करें, तो ये अद्वितीय शास्त्र हमें ये ज्ञान देते हैं कि चाहे कैसी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यूँ ना हों, ज्योतिष और वास्तु की सहायता से इन दोषों को कम किया जा सकता है और अपने विपरीत परिस्थितयों को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है |
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के मुताबिक वास्तु शास्त्र में घड़ी लगाने के भी कुछ नियम बताए गए है। गलत ढंग से लगाई गई घड़ी आपका नुकसान करवा सकती है। वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार सुनकर शायद यकीन न करें लेकिन यह सच है कि दीवाल पर टंगी घंड़ियां भी घर में सुख-समृद्धि लाती हैं। वास्तु शास्त्र  के अनुसार घड़ी की सूईयां एवं पेंडुलम से सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। इसलिए कभी भी घर में बंद घड़ी नहीं रखें इससे उन्नति रूक जाती है।
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार घड़ी का चलते रहना निरन्तर विकास का प्रतीक है। समय से पीछे चलती घड़ी भी वास्तु शास्त्र के अनुसार सही नहीं होती है। व्यवहारिक जीवन में भी घड़ी का समय से पीछे चलना कई बार परेशानी का करण बनता है इसलिए घड़ी का समय सही रखें। घड़ी टांगने का संबंध समय देखने के अलावा घर की साज-सज्जा से भी है। तीसरी बात यह है कि उचित और वास्तु सम्मत स्थान पर घड़ी टांगने से उस कमरे या घर के लोगों का जीवन जहां अनुशासित रहता है, वहीं समय की गति के साथ उनका जीवन भी क्रियाशील यानी एक्टिव रहता है।
घर की बनावट के अनुसार ही दीवार घड़ी या टाइम पीस को लगाने का प्रावधान करना चाहिए। अगर आपके पास छोटा और सीमित आकार वाला घर हो, तो सिर्फ ड्राइंग रूम में ही वॉल-क्लॉक लगाना चाहिए।
जानिए घड़ी को कहां पर लगाएं ???
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार घड़ी कभी भी दक्षिण दिशा वाली दीवार पर नहीं लगाएं। दक्षिण दिशा को वास्तु शास्त्र  में  शुभ नहीं माना गया है क्योंकि यह यम की दिशा होती है। विज्ञान के अनुसार इस दिशा में निगेटिव एनर्जी होती है। दक्षिण दिशा की दीवार पर घड़ी होने से बार-बार आपका ध्यान इस दिशा की ओर जाएगा। इससे बार-बार दक्षिण दिशा की नकारात्मक उर्जा आप प्राप्त करेंगे।
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार घड़ी को कभी भी मुख्य द्वार के ठीक सामने अथवा दरवाजे के ऊपर नहीं लगाना चाहिए। इससे घर से बाहर आते और जाते समय आपके आस-पास की उर्जा प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप तनाव बढ़ता है। कुछ लोग सोते समय घड़ी तकिया के नीचे रख लेते हैं। ऐसा करने से घड़ी की टिक-टिक से नींद खराब होती है। 
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के मुताबिक आजकल जो भी घड़ियां आती हैं वह आमतौर पर बैट्री से चलती हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जो इलेक्ट्रो-मैग्नेनिटक तरंग निकलता है उसका प्रभाव मस्तिष्क एवं हृदय पर पड़ता है। इसलिए फेंगशुई के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी तकिये के नीचे घड़ी रखना अच्छा नहीं माना जाता है। ।
जानिए घड़ी की सही दिशा
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार घडी को दीवार पर लगाने के लिए उत्तर, पूर्व एवं पश्चिम दिशा को आदर्श माना जाता है। इन दिशाओं को पोजेटिव एनर्जी प्रदान करने वाला माना जाता है। ड्रांईंग रूम या बेडरूम में घड़ी ऐसे लगाएं ताकि रूम में प्रवेश करने पर घड़ी पर नज़र जाए। यह भी ध्यान रखें कि घड़ी पर धूल-मिट्टी न जमे।  मधुर संगीत उत्पन्न करने वाली दीवार घड़ी घर के मुख्य हॉल में लगानी चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। 
जानिए इसके साथ ही साथ क्या करें और क्या न करें ?
दक्षिण दिशा में घड़ी कदापि न लगायें .
घर के मुख्य दरवाज़े के ऊपर भी घड़ी कभी न लगायें.
बंद पड़ी हुयी घड़ियों को यथाशीघ्र सही करवाएं .
यदि घड़ी बिलकुल ख़राब हो गयी हो तो घर में ना रखें .
किसी भी रिश्तेदार को भूल कर भी गिफ्ट में घड़ी ना दें .
यदि घड़ी का समय आगे या पीछे हो गया हो तो उसे सही समय से मिला लें .
घड़ी का समय आगे या पीछे न रखें .
दीवार घड़ी पर कभी धुल न जमने दें, समय समय पे उसे साफ़ करते रहा करें .
घर का माहौल खुशनुमा बनाये रखने के लिए उन घड़ियों को लगायें जिनकी संगीत मधुर हो .
सोते समय तो हरगिज़ भी तकिये के नीचे कोई भी घड़ी न रखें .
घर के पूर्व, उत्तर और पश्चिम में ही घड़ी लगायें .
-घर के ड्राइंग रूम में पेंडुलम वाली घड़ियाँ लगाने से सौभ्य वृधि होती है .
गोल, आयताकार घड़ियाँ शुभ प्रभाव लाती हैं.
जानिए कौन सी घड़ी लकी है—-
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार घड़ियों का आकार वास्तु शास्त्र में काफी मायने रखता है। इसलिए जब अब घड़ी खरीद रहे हों तो इस बात का ध्यान रखें कि क्या आपकी घड़ी वास्तु शास्त्र के अनुसार आपके लिए लकी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अंडाकार, गोल, अष्टभुजाकार और षट्भुजाकार एवम आयताकार घड़ियाँ शुभ प्रभाव लाती हैं |
जानिए घडी लगते समय क्या रखें सावधानिया
—-स्टडी रूम में पूर्व या वायव्य कोण में घड़ी लगाना सर्वोत्तम रहेगा। इससे जहां वहां कार्यरत अध्ययनकर्ता की एकाग्रता बनी रहेगी, वहीं उनका समय भी फालतू कार्यों और दिमागी उलझनों में बर्बाद नहीं होगा।
—-वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार ड्राइंग रूम में पूर्व या वायव्य कोण में दीवार घड़ी लगाने से घर के सदस्यों की शारीरिक और मानसिक ऊर्जा गतिमान रहेगी। उनके जीवन में नवीनता और गतिशीलता आएगी। पूर्व दिशा में लगाई गई दीवार घड़ी उनको सदैव समय पर जागृत रखेगा और किसी भी आकस्मिक घटना-दुर्घटना के प्रति वे समय रहते सचेत हो जाएंगे। साथ ही घर के सदस्यों का जीवंत व्यवहार बैठक यानी ड्राइंग रूम को आबाद रखेगा और उसमें साज-सज्जा के नए-नए और आधुनिक वास्तु सामग्री का संग्रह होता ही रहेगा। अच्छा ड्राइंग रूम गृहस्थ के सुविचार और अच्छे टेस्ट का प्रतीक बनेगा।
—-यदि ड्राइंग रूम के उत्तर की ओर दीवार घड़ी लगाते हैं, तो आर्थिक कार्य समय पर बनते रहेंगे। घर में धन की आवक समय पर होगी, लेकिन उत्तर की ओर पितर और देवताओं का वास होता है। अत: किसी देवी-देवता की चित्र या फोटो प्रतीक लगी हुई दीवार घड़ी लगाई जाए, तो ड्राइंग की साज-सज्जा में चार चांद लग जाएंगे।
—-वायव्य कोण बदलाव का प्रतीक है। हवा यानी वायु हर समय इस दिशा को साफ करती है। इस दिशा में अगर घड़ी लगाना हो, तो सादा और गोलाकार या अंडाकार नमूने की ही घड़ी लगानी चाहिए, ताकि समय की गति और बदलाव के अच्छे और सुखद क्षण बार-बार आते रहें। जिस प्रकार हवा गोल दायरे में चक्कर काटती है, वैसे ही मानव जीवन भी एक आवृति लिए रहता है। उसमें दुख-सुख अपना चक्कर पूरा करते रहते हैं।
वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार यह भी ध्यान रहे कि जहां भी घड़ी लगाई जा रही है, वहां या उसके आसपास शेर, भालू, सियार गिद्द, सुअर, घडि़याल, बाघ, चीता या सांप आदि परभक्षी व खतरनाक प्राणियों के चित्र नहीं लगाने चाहिए। इससे जहां समय की धारा विरुद्ध हो जाती है, वहीं अन्य प्रकार के वास्तु-दोष घर के सदस्यों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।
—-वास्तुशास्त्री श्री सिंह के अनुसार बेडरूम में सदैव उत्तर या उत्तरपूर्व दिशा में ही घड़ी लगानी चाहिए। वैसे, यहां अधिक खटपट करने वाली क्लॉक नहीं लगानी चाहिए और न ही अलार्म रहित घड़ी। हां, प्रत्येक घंटे चेतावनी देने वाली टबिल क्लॉक बेड रूम में लगाना अच्छा नहीं रहेगा। इससे नींद में खलल पड़ेगा।
—-वास्तु शास्त्र के अनुसार कभी भी घर के मुख्य द्वार या दरवाजे के ऊपर घड़ी लगाना भी शुभ नहीं माना गया है. घर के मुख्य द्वार पर घडी लगाने से घर में तनाव बढ़ता है |
घर में बहुत पुरानी या बार-बार खराब होने वाली और धुंधले शीशे वाली घड़ियां भी नहीं लगनी चाहिए ये की सफलता में बाधक है |
—-आजकल बाजार में जो घड़िया आयी है वह अधिकतर बैट्री से चलती हैं. इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जो इलेक्ट्रो-मैग्नेनिटक तरंग निकलती है ये हमारे मस्तिष्क एवं हृदय पर बुरा प्रभाव डालती है वास्तुशास्त्र के अनुसार और वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी घड़ियों को तकिये के नीचे नहीं रखना चाहिए |
—-ऑफिस या कार्यस्थल पर लगाई जाने वाली घडी का साइज कुछ बड़ा होना चाहिए ये गाड़ी दिखने में साफ़ सुथरी होनी चाहिए. बहुत पुरानी और रुक-रुक कर चलने वाली घड़ी कार्यालय में नेगेटिव ऊर्जा लाती है |
दीवार की घडी पर कभी भी धूल-मिट्टी न जमने दे समय-समय पर घडी पर जमी धूल मिटटी को साफ़ करते रहे |
—-यदि घडी का शीशा टूटा हो तो उसे समय पर बदल देना चहिये अन्यथा घर में नेगेटिव ऊर्जा आती है|
—-घड़ी को घर पर ऐसे स्थान में लगाए जहा से सभी को आसानी से दिखाई दे |

—-कभी भी बेड के सिरहाने वाली दीवार पर कोई घड़ी या फोटो फ्रेम न लगाए इससे घर के सदस्यों में सर दर्द की समस्या बनी रहती है 

Wednesday, 17 August 2016

रावण सहिंता से समस्या निवारण (नागपाश) प्रयोग -:एक अचूक उपाय** सबसे शक्तिशाली उपाय

दंश चाहे रिश्तो में हो , रुपये पैसे में हो , शादी नौकरी में हो , रोग कर्ज़ में हो । जहर तो परेशान कर ही रहा है थोडा या बहुत ।सर्प चाहे शनि का हो या बिगड़े मंगल का या बिगड़े शुक्र का या कालसर्प का । अब काबू करना ही है । और जीनी है एक खुशहाल जिंदगी , घुटन से दूर ऐसी जिंदगी जिसमे रोज़ रोना न हो एक ख़ुशी भरी जिंदगी जिसमे हर काम बनते जाए कोई भी काम ना बिगड़े ।            
उपाय ::

असली उपाय तो यह है की एक प्रतीकात्मक रूप में (अभिमंत्रित )सांप की केंचुली लो ,कोई हथेली जितनी । इसमें नीला थोथा (जहर) भरो थोडा सा । और इसको काले कपडे में लपेट कर अपने गद्दे के नीचे रख लो । यह एक साक्षात् सर्प के रूप में दब जायेगा । कितना भी बिगड़े से बिगड़ा रिश्ता हो वो सुधर जायेगा अपने आप चला के एक चमत्कार की तरह ।तलाक का बिगड़ा से बिगड़ा मामला भी , और रिश्ते की तो कहना ही क्या । छोटी मोटी पति पत्नी की कलह , किसी का रिश्ते से इंकार इत्यादि सब अपने आप सुधरने लगेंगे ।

यदि यह उपाय मुश्किल लगता है तो ।


जिनको यह न मिले

वो कोई रस्सी ले ले हथेली भर । मुंज (अभिमंत्रित) की हो तो ज्यादा अच्छा । नीला थोथा नहीं मिले तो बाजार से allout liquid ले आये । इसमें रस्सी को भिगो ले ।कपूर जला के उसके ऊपर से घुमा ले उल्टा । काले कपडे में लपेट ले ।और गद्दे के नीचे रख दे । कैसे भी कर ले । ज्यादा असर के लिए अपने सिरहाने मोरपंख भी रख सकते है ।

और निश्चिन्त हो जाये ।

सारी दिक्कत अपने आप सही होने लगेंगी ।


यह जानकारी एक वरिष्टविजय जी  द्वारा दी गई है | 

( यह सारे उपाय किसी जानकार की देखरेख में ही करें | किसी भी त्रुटी के लिए आप स्वयं जवाबदार होंगे लेखक नहीं )

Thursday, 5 May 2016

सही ज्योतिष सलाहकार का चुनाव कैसे करें



ज्योतिष दिव्य विज्ञान विषय की मदद के माध्यम से हर कोई जीवन में बहुत जल्द प्रगति करना चाहता है। शहर में कई लोग अपनी अर्धकचरी ज्योतिष जानकारी से समाज को गुमराह कर रहें हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी से आप, ज्योतिष दिव्य विज्ञानं में आपकी आस्था से किया जाने खिलवाड़ को रोक सकतें हैं। साथ ही साथ ज्योतिष पवित्र शास्त्र की गरिमा संरक्षित रखने में भी आपका पुण्य योगदान हो सकेगा।

सदैव ध्यान रखें:

अपनी भविष्यवाणी को बढ़ाचढ़ा कर कर पेश करने वालों को दूर से ही नमस्कार कर लें।

निशुल्क या स्वेच्छाशुल्क द्वारा ज्योतिष परामर्श देने वाले महान पंडित जी से किसी भी तरह का परामर्श लेने के पहले समझ लें ये आपके जीवन में उपयोगी नहीं सिद्ध होगा।

अपनी समस्या या जन्म कुंडली को सोशल साइट्स पर ज्यादा पंडित को दिखाने के फेर में न रहें। इससे भ्रम की स्तिथि का शिकार होकर अपने कर्म में दिशाहीनता को प्राप्त हो सकने की सम्भावना प्रबल ही करेंगे।

जन्मपत्रिका, फलित, समय की विवेचना किसी ऐसे ज्योतिष जानकर से ही प्राप्त करें जो कम से कम एक निर्धारित मात्रा में आपकी पत्रिका और आपको समय दे सकने की स्तिथि में हो।

फ्री परामर्श के वजाय शुल्क / दक्षिणा के साथ ही ज्योतिष परामर्श प्राप्त करने का नियम बांध लें।

दूरभाष के वजाय परामर्श प्राप्ति हेतु अपने ज्योतिष जानकर दोस्त तक व्यक्तिगत रूप से पहुचने का माध्यम ही हितकर जाने। जाहिर सी बात है की किसी का भी personal attention सामने उपस्थित होकर ही प्राप्त करा जा सकता है।

व्यक्तिगत परामर्श के दौरान होने वाला discussion अपनी एक या दो तात्कालिक समस्या तक ही सिमित रखें।

ज्योतिष जानकर भाई से अपनी जीवन में हुए कुछ recent progress/downfall का accurate samay आधारित विवरण discussion के शुरुआत में जानने का प्रयास करें। धयान रखें इस के द्वारा आप पंडित जी की विषय कुशलता तो समझ ही लेंगें साथ ही साथ कुंडली ठीक बनी है या नहीं, ये भी पुष्ट हो सकेगा।

ज्योतिष परामर्श के दौरान सभी बातचीत के तथ्य नोट जरुर करें।

अच्छा समय कब बन रहा है ?

ये जानकारी अवश्य ले। ध्यान रखें आपका वक्त और जन्म पत्रिका कितनी भी दुर्बल क्यों न हो, आने वाला "अच्छा समय की जानकारी मात्र ही आपके हौसले को बुलन्द्कर आपके समय को आज से ही बदल सकने में पूर्णतया सक्षम है"।

यदि आप दुर्बल समय के चलते ग्रह सम्बंधित कोई उपाय करने हेतु गम्भीर, प्रबल इच्छायुक्त एवं द्रर्ण संकल्पित हैं तो आपकी जीवनशैली अनुरूप उपाय की जानकारी हेतु निवेदन अवश्य करें। 

हर उपाय हर किसी के लिए सामान रूप से उपयोगी नहीं साबित होते हैं। व्यक्तिगत परामर्श में बातचीत की संजीदगी के माध्यम से आपकी जीवनशैली के अनुसार ही उपाय बताने की सम्भावना बनती है।

बताये गए उपाय पर कम से कम तीन माह अमल जरुर करें। कुछ शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक उर्जा बदलने के शुरुआती संकेत होते हैं जो आप खुद भी notic कर सकने में समर्थ हैं।

उर्जा संतुलन हेतु किये जा रहें उपाय मन्त्र जप, हवन, नमक सेवन वर्जन, जल सेवन वर्जन, दान, यन्त्र धारण स्रोत/ कवच पाठ के द्वारा बनने वाले आत्मिक वैचारिक बल बदलाव को कैसे समझा जाये ये आपका सलाहकार आपको पूर्व में ही guide कर सकने में समर्थवान हो सकता है।

धयान रखें की उपाय शुरू करते ही 2 हफ्ते के भीतर ( चंद्रमा 180 डिग्री, सूर्य 15 डिग्री गोचर भ्रमण दौरान) ही ग्रहबल वर्धन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अश्थापूर्वक उपाय करने के बावजूद भी लाभ न मिलने की दशा में अपने astrologer को पुनः संपर्क कर इस बारे में जरुर बताएं।

कलियुग में कोई भी इन्सान किसी भी रूप में आपकी मदद को पूर्णतया तभी तैयार होगा जब आप पूर्ण श्रद्धा भाव से व्यक्तिगत रूप से मिलकर कुछ निवेदन करेगें।

गुरु का स्थान गोविन्द से भी बड़ा है। 

सही नीयत और जानकारी वाले गुरु तक पहुचना एक अनिवार्य नियम है। इसकी अवहेलना से बचकर रहना ही सुमति का परिचायक है, बाकि आपकी मर्जी..

Saturday, 23 May 2015

सप्तमेश मंगल के वैवाहिक जीवन पर दुष्प्रभाव

मंगल का सप्तम में होना पति या पत्नी के लिये हानिकारक माना जाता है,उसका कारण होता है कि पति या
पत्नी के बीच की दूरिया केवल इसलिये हो जाती है क्योंकि पति या पत्नी के परिवार वाले जिसके अन्दर माता या पिता को यह मंगल जलन या गुस्सा देता है,जब भी कोई बात बनती है तो पति या पत्नी के लिये सोचने लायक हो जाती है,और अक्सर पारिवारिक मामलों के कारण रिस्ते खराब हो जाते है। पति की कुंडली में
सप्तम भाव मे मंगल होने से पति का झुकाव अक्सर सेक्स के मामलों में कई महिलाओं के साथ हो जाता है,और पति के कामों के अन्दर काम भी उसी प्रकार के होते है जिनसे पति को महिलाओं के सानिध्य मे आना पडता है। पति के अन्दर अधिक गर्मी के कारण किसी भी प्रकार की जाने वाली बात को धधकते हुये अंगारे की तरफ़ मारा जाता है,जिससे पत्नी का ह्रदय बातों को सुनकर विदीर्ण हो जाता है,अक्सर वह मानसिक बीमारी
की शिकार हो जाती है,उससे न तो पति को छोडा जा सकता है और ना ही ग्रहण किया जा सकता है,पति की माता और पिता को अधिक परेशानी हो जाती है,माता के अन्दर कितनी ही बुराइयां पत्नी के अन्दर दिखाई देने
लगती है,वह बात बात में पत्नी को ताने मारने लगती है,और घर के अन्दर इतना क्लेश बढ जाता है कि पिता के लिये असहनीय हो जाता है,या तो पिता ही घर छोड कर चला जाता है,अथवा वह कोर्ट केश आदि में चला जाता है,इस प्रकार की बातों के कारण पत्नी के परिवार वाले सम्पूर्ण जिन्दगी के लिये पत्नी को अपने साथ ले जाते है। पति की दूसरी शादी होती है,और दूसरी शादी का सम्बन्ध अक्सर कुंडली के दूसरे भाव से सातवें और ग्यारहवें भाव से होने के कारण दूसरी पत्नी का परिवार पति के लिये चुनौती भरा हो जाता है,और पति के लिये दूसरी पत्नी के द्वारा उसके द्वारा किये जाने वाले व्यवहार के कारण वह धीरे धीरे अपने कार्यों से अपने व्यवहार से पत्नी से दूरियां बनाना शुरु कर देता है,और एक दिन ऐसा आता है कि दूसरी पत्नी पति पर उसी तरह से शासन करने लगती है जिस प्रकार से एक नौकर से मालिक व्यवहार करता है,जब भी कोई बात होती है तो पत्नी अपने बच्चों के द्वारा पति को प्रताड़ित  करवाती है,पति को मजबूरी से मंगल की उम्र निकल जाने
के कारण सब कुछ सुनना पडता है।

किसी ग्रह के अशुभ फल देने से क्या क्या घटित हो सकता है |

आइये मोटे तौर पर जाने कि किसी ग्रह के अशुभ फल देने से क्या क्या घटित हो सकता है | ]
सूर्य: सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी, सिर दर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि।
चंद्र: मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, कफ, सर्दी, जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म, निमोनिया।
मंगल: अधिक क्रोध आना, दुर्घटना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, बवासीर, भाइयों से अनबन आदि।
बुध: गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि।
गुरु: धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास आदि।
शुक्र: जीवन साथी के सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरुचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि।
शनि: वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, पैरों में दर्द, नौकरी में परेशानी आदि।
राहु: त्वचा रोग, कुष्ठ, मस्तिष्क रोग, भूत प्रेत वाधा, दादा से परेशानी आदि।
केतु: नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू टोने से परेशानी, रक्त विकार, चेचक आदि।
इस प्रकार ग्रहों के कारकत्व को ध्यान में रखते हुए शास्त्र
सम्मत उपाय करना चाहिए।

Saturday, 27 December 2014

कहीं आपके साथ भी तो ऐसा नही हो रहा ?

यदि जीवन में निरंतर समस्याए आ रही है। और यह प्रतीत हो की जीवन में कही कुछ सही नही हो रहा तो निश्चित रूप से हो सकता है आप पैरानार्म्ल समस्याओं से ग्रस्त है। आपके आस पास नेगेटिव एनर्जी है। यदि ऐसा है तो कुछ पहलुओ पर जरुर गौर करे।

1) पूर्णिमा या अमावस्या में घर के किसी सदस्य का Depression या Aggression काफी बढ़ जाना या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओ का बढ़ जाना।
2) बृहस्पतिवार, शुक्रवार या शनिवार में से किसी एक दिन प्रत्येक सप्ताह कुछ ना कुछ नकारात्मक घटनाएं घटना।
3) किसी ख़ास रंग के कपडे पहनने पर कुछ समस्याए या स्वास्थ्य पर असर जरुर होना।
4) घर में किसी एक सदस्य द्वारा दुसरे सदस्य को देखते ही अचानक से क्रोधित हो जाना।
5) पुरे मोहल्ले में सिर्फ आपके घर के आस पास कुत्तों का इकट्ठा होना।
6) घर में किसी महिला को हर माह अमावस्या में Period होना।
7) घर में किसी ना किसी सदस्य को अक्सर चोट चपेट लगना।
8) वैवाहिक संबंधो में स्थिरता का ना होना।
9) घर में किसी सदस्य का उन्मादी या नशे में होना।
10) सोते समय दबाव या स्लीपिंग पैरालाइसेस महसूस करना।
11) डरावने स्वप्न देखना।
12) स्वप्न में किसी के डर से खुद को भागते हुए देखना।
13) स्वप्न में अक्सर साँप या कुत्ते को देखना।
14) स्वप्न में खुद को सीढ़ी से नीचे उतरते देखना और आख़िरी सीढ़ी का गायब होना।
15) किसी प्रकार के गंध का अहसास होना।
16) पानी से और ऊँचाई से डर लगना।
17) सोते वक्त अचानक से कुछ अनजान चेहरों का दिखना।
18) अनायास हाथ पाँव का कांपना।
19) अक्सर खुद के मृत्यु की कल्पना करना।
20) व्यापार में अचानक उतार चढ़ाव का होना।
ये मुख्य ल्क्ष्ण है, जिनसे आप खुद जान सकते है की आपको या आपके घर में किसी प्रकार की पैरानार्म्ल प्राब्लम तो नही।

Wednesday, 5 November 2014

सियार सिंघी

सियार सिंघी बहुत ही चमत्कारी होती है , इसे घर में रखने से सकारात्मक उर्जा का अनुभव होता है ! सियार सिंघी बालो का एक गुच्छा होता है ! असल में सियार के सिंघ नहीं होते परन्तु कुछ सियारों के नाक के ऊपर बालो का एक गुच्छा बन जाता है , धीरे धीरे वह कड़ा हो जाता है और सिंघ जैसा बन जाता है इसे सियार सिंघी कहते है और यह हजारों में से किसी एक के नाक पर होता है ! इसमें वशीकरण की अद्भुत शक्ति होती है , यदि इसे सिद्ध कर लिया जाए तो यह शक्ति हजारों गुना बढ़ जाती है ! इसके द्वारा आप किसी से भी अपना मनोवांछित काम करवा सकते है ! इसे सिद्ध करने की अनेकों विधियाँ है , पर यदि इसे होली या दिवाली के दिन सिद्ध किया जाए तो इसका चमत्कार बड़ी जल्दी नज़र आता है !

मैं आपके सबके सामने एक आसान और प्रमाणिक विधि लिख रहा हूँ जिस से आप सियार सिंघी को सिद्ध कर पूर्ण लाभ उठा सकते है ! यह विधि दिवाली से दस दिन पहले शुरू की जाती है मतलब दसवां दिन दिवाली होना चाहिये !
|| मन्त्र ||
ॐ चामुण्डाये नमः
|| विधि ||
दिवाली से दस दिन पहले एक सियार सिंघी का जोड़ा ले , उसे लाल कपडे पर स्थापित करे ! ऐसा करने के बाद लाल आसन बिछा कर लाल वस्त्र धारण कर बैठ जाएँ और एक सरसों के तेल का दीपक जलाएँ ! उस सियार सिंघी पर गंगा जल का छींटा दे ! उस पर चावल चढ़ाएँ और पांच लौंग साबुत और पांच चोटी इलायची चढ़ाये और इस मन्त्र का २१०० बार जप करे ! जप समाप्ति के बाद अग्नि में २१ आहुति गुग्गल की दे ! ऐसा रोज दिवाली तक करे !
दिवाली वाली रात पूजा के बाद इस नीचे लिखे मन्त्र का सियार सिंघी के सामने ११०० बार जाप करे !
|| मंत्र ।।
रंगली पीढ़ी रंगले पावे
जित्थे पुकारा ओथे आवे
नाले अंग नाल अंग मिलावे
नाले घर दा घर खिलावे !!
इस मन्त्र को जपने के बाद सियार सिंघी को किसी चांदी या ताम्बे की डब्बी में मीठा सिन्धुर डाल कर उसमें पांच लौंग पांच इलायची और एक कपूर का छोटा सा टुकड़ा डाल कर रख ले !
|| प्रयोग विधि ||
जब किसी पर प्रयोग करना हो तो इस डिब्बी को खोल कर सियार सिंघी के सामने दोनों मन्त्रों का एक एक माला जाप करे और उस व्यक्ति का नाम बोल कर चामुंडा मां से उसे अपने अनुकूल करने की प्रार्थना करे और डब्बी को अपनी जेब में रखकर चले जाएँ ! आपका कार्य सिद्ध हो जायेगा !

उपरोक्त विधि  अपनी रिस्क पर सम्पादित करें क्योंकि एक छोटी सी भूल  लाभ को हानि में  बदल सकती है  
यदि आप चाहे तो दीपावली के शुभ अवसर पर  विधि अनुसार  सिद्ध की गई सियार  सिंघी  उपलब्ध है