Saturday, 15 March 2014

होली के कुछ अन्य प्रयोग


आइए होली की रात के कुछ अन्य तंत्र सिद्धियां जानते हैं:-
व्यापार बढ़ाने के लिए
इस बार होली रविवार को है। शनिवार को ऐसे पेड़ के नीचे जाए जिस पर चमगादड़ लटकती हो उस पेड़ की एक डाल को निमंत्रण दे कि कल हम तुम्हें ले जाएंगे। होली वाले दिन सूर्योदय से पूर्व उस डाल को तोड़कर ले आए। रात को उस डाल एवं उसके पत्तों का पूजन कर अपनी गद्दी के नीचे रखें। व्यवसाय खूब फलेगा-फूलेगा।
धन में वृद्धि हेतु
ऊँ नमो धनदाय स्वाहा
होली की रात इस मंत्र का जाप करने से धन में वृद्धि होती है।
रोग नाश हेतु
ऊँ नमो भगवेत रुद्राय मृतार्क मध्ये संस्थिताय मम शरीरं अमृतं कुरु कुरु स्वाहा, इस मंत्र का होली की रात जाप करने से कैसा भी रोग हो नाश हो जाता है।
शीघ्र विवाह हेतु
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होली के दिन सुब एक साबूत पान पर साबूत सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढ़ाएं तथा पीछे पलटे बगैर अपने घर आ जाएं यही प्रयोग अगले दिन भी करें। अतिशीघ्र विवाह हो जाता है।
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गोरखमुण्डी का पौधा लाकर उसको धोकर होली की रात उसका पूजन करें फिर उसको होली की अग्नि में सुखा दें तथा पांच दिन सूखने दे पंचमी के दिन उसको पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण कई प्रयोग में आता है।
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सुबह शाम इस चूर्ण को शहद से चाटने पर स्मरण एवं भाषण शक्ति बढ़ती है।
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दूध के साथ इस चूर्ण का सेवन करने से शरीर स्वस्थ और बलिष्ठ होता है। इस चूर्ण के पानी से बाल धोने पर बाल लंबे और काले घने होते हैं। इस चूर्ण के तेल से शरीर की ऐंठन, जकड़न दूर होती है।
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ऐसे बचें टोटकों से
टोने-टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। होलिका दहन वाले दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिये।
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उतार और टोटके का प्रयोग सिर पर जल्दी होता है, इसलिए सिर को टोपी आदि से ढके रहें।
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टोने-टोटके में व्यक्ति के कपड़ों का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अपने कपड़ों का ध्यान रखें।

Monday, 10 March 2014

होली पर सिद्ध करें हत्था जोड़ी

होली का त्यौहार आ रहा है इस समय तंत्र मंत्र आदि कि साधनाये भी कि जाती है ,आज आप लोगो को हत्था जोड़ी के बारे में बताता हूँ यह बहुत ही शक्तिशाली व प्रभावकारी वस्तु है
हत्था जोड़ी एक जंगली पौधे की जड़ होती है जो प्रायः ठन्डे प्रदेशों में पाई जाती है ,यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य में सफलता मिलती है
तंत्र शास्त्र में यह चमत्कारी साबित हुई है
इसका प्रयोग प्रायः कोर्ट कचहरी ,मुकदमा ,शत्रु बाधा से मुक्ति आदि के निवारण में तथा वशीकरण आदि में प्रयोग किया जाता है 



हत्था जोड़ी में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात चामुंडा देवी का प्रतिरूप है. यह जिसके पास भी होगा वह अद्भुत रुप से प्रभावशाली होगा. सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा में अत्यंत गुणकारी होता है,

कैसे सिद्ध करे हत्था जोड़ी.
होली की रात को कुंए के पास जाकर थोड़ी मिट्टी खोद कर उसकी एक गणेशजी की मूर्ति बनाएं। उसके ऊपर सिंदूर से लेपन कर रातभर उसका अभिषेक-पूजन करें। सुबह आरती के बाद विसर्जन कर दें। इससे प्रयोग से भी शीघ्र ही धन लाभ होने लगता है।

हत्था जोड़ी जो की एक महातंत्र में उपयोग में लायी जाती है और इसके प्रभाव से शत्रु दमन तथा मुकदमो में विजय हासिल होती है !

मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते हैं फिर भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आपको अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उपाय करना चाहिए। इसके लिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्था जोड़ी घर लाएं। इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर में किसी सुरक्षित स्थान में अथवा तिजोरी में रख दें। इससे आय में वृद्घि होगी एवं धन का व्यय कम होगा।

तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है.
हाथा जोड़ी एक जड़ है। होली के पूर्व इसको प्राप्त कर स्नान कराकर पूजा करें तत्पश्चात तिल्ली के तेल में डूबोकर रख दें। दो हफ्ते पश्चात निकालकर गायत्री मंत्र से पूजने के बाद इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में रख दें। इससे धन लाभ होता है।हाथा जोड़ी को इस

मंत्र से सिद्ध करें-
ॐ किलि किलि स्वाहा।

आज कल प्रायः नकली हत्था जोड़ी मिलती है जो चमड़े या किसी जानवर के पैर आदि से बना कर पाखंडी लोग अपना जेब भरते है , जिसमे दुर्गन्ध भी आती है अतः लेने से पूर्व भली भांति जाँच परख कर ही हत्था जोड़ी प्राप्त करे।

Sunday, 9 March 2014

होली के अदभुत प्रयोग / उपाय (Holi Remedies)

1. होली की पूजा मुखयतः भगवान विष्णु (नरसिंह अवतार) को ध्यान में रखकर की जाती है।
2. घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में देशी घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए । होली की ग्यारह परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है, कष्ट दूर होते हैं।
3. होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल
दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म हो जाएगा।
4. होली दहन के समय ७ गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें।
5. होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोडी सी राई व नमक मिलाकर रख
लें। इस प्रयोग से भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।
6. होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का ४० दिन तक नियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण
होगी।
7. यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो २१ गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में शिवलिंग पर चढा दें।
8. नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख मिश्रित जल से स्नान करें।
9. होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें।
10. होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख - समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है।
11. यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए। परिणाम स्वयं देखे।
12. राहु का उपाय - एक नारियल का गोला लेकर उसमे अलसी का तेल भरकर..उसी में थोडा सा गुड डाले..फिर उस नारियल के गोले को राहू से ग्रस्त व्यक्ति अपने शारीर के अंगो से स्पर्श करवाकर जलती हुई होलिका में डाल देवे. पुरे वर्ष भर राहू से परेशानी की संभावना नहीं रहेगी…
13. मनोकामना की पूर्ति हेतु होली के दिन से शुरू करके प्रतिदिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं, मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।
14. होली की प्रातः बेलपत्र पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर
सच्चे मन से अर्पित करें। बाद में सोमवार को किसी मंदिर में भोलेनाथ को पंचमेवा की खीर अवश्य चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होगी।
15. स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।
16. व्यापार लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा।
17. होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर दूकान में या व्यापार स्थल पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।
18. धनहानि से बचाव के लिए होली के दिन मुखय द्वार पर गुलाल छिड़कें और उस पर द्विमुखी दीपक जलाएं।
दीपक जलाते समय धनहानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में
डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि से बचाव होगा।
19. दुर्घटना से बचाव के लिए होलिका दहन से पूर्व पांच काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर पीठ करके पांचों गुन्जाओं को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें।
20. होली के दिन प्रातः उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से कोई वस्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर
रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रुमाल नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय सावधानीपूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा। आत्मरक्षा हेतु किसी को कष्ट न पहुंचाएं, किसी का बुरा न करें और न सोचें। आपकी रक्षा होगी।
21. अगर आपके घर में कोई शारीरिक कष्टों से पीड़ित है - ओर उसको रोग छोड़ नहीं रहे है - तो 11 अभिमंत्रित
गोमती चक्र बीमार ब्यक्ति के शरीर से 21 बार उसार कर होली की अग्नि में डाल दे शारीरिक कष्टों से शीघ्र
मुक्ति मिल जायेगी
22. अगर बुध ग्रह आपकी कुंडली में संतान प्राप्ति में बाधा दाल रहा है तो किसी भी बच्चे वाली गरीब महिला को होली वाले दिन से शुरु कर एक महीने तक हरी-सब्जियाँ दें। माता वैष्णो-देवी से संतान की प्रार्थना करें।
23. शीघ्र विवाह हेतु : जो युवा विवाह योग्य हैं और सर्वगुण संपन्न हैं, फिर भी शादी नहीं हो पा
रही है तो यह उपाय करें। होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और अपने साथ 1 साबूत पान, 1 साबूत
सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग
पर अर्पित करें। इसके बाद पीछे देखें बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। इसके साथ
ही समय-समय शुभ मुहूर्त में यह उपाय किया जा सकता है। जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे।

Saturday, 8 March 2014

श्रेष्ठ और मनचाही संतान प्राप्ति के लिए गुरूवार ( वीरवार) को करें यह उपाय :

1 दंपति को गुरुवार का व्रत रखना चाहिए।
2 गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करें,पीली वस्तुओं का दान करें यथासंभवपीला भोजन ही करें।
3 माता बनने की इच्छुक महिला को चाहिए गुरुवार के दिनगेंहू के आटे की 2 मोटी लोई बनाकर उसमेंभीगी चने की दाल औरथोड़ी सी हल्दी मिलाकरनियमपूर्वक गाय को खिलाएं।
4 शुक्ल पक्ष में बरगद के पत्ते को धोकर साफ करके उस परकुंकुम से स्वस्तिक बनाकर उस पर थोड़े से चावल और एकसुपारी रखकर सूर्यास्त से पहलेकिसी मंदिर में अर्पित कर दें और प्रभु से संतानका वरदान देने के लिए प्रार्थना करें निश्चय ही संतानकी प्राप्ति होगी ।
5 गुरुवार के दिन पीले धागे मेंपीली कौड़ी को कमर में बांधने सेसंतान प्राप्ति का प्रबल योग बनता है।
6 माता बनने की इच्छुक महिला को पारद शिवलिंगका रोजाना दूध से अभिषेक करें उत्तम संतान की प्राप्ति होगी ।
7 हर गुरुवार को भिखारियों को गुड़ का दान देने सेभी संतान सुख प्राप्त होता है ।
8 पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में आम की जड़ को लाकर उसे दूध में घिसकर स्त्री को पिलाएं यह सिद्ध एंवम परीक्षित प्रयोग है ।
9 रविवार को छोड़कर अन्य सभी दिन निसंतान स्त्री यदि पीपल पर दीपक जलाए और उसकी परिक्रमा करते हुए संतान की प्रार्थना करें उसकी इच्छा अति शीघ्र पूरी होगी ।
10 श्वेत लक्ष्मणा बूटी की 21 गोली बनाकर उसे नियमपूर्वक गाय के दूध के साथ लेने से संतान सुख की अवश्य
ही प्राप्ति होती है ।
11 उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में नीम की जड़ लाकर सदैव अपने पास रखने से निसंतान दम्पति को संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है ।
12 नींबू की जड़ को दूध में पीसकर उसमे शुद्ध देशी घी मिला कर सेवन करने से पुत्र प्राप्ति की संभावना बड़ जाती है ।
13 पहली बार ब्याही गाय के दूध के साथ नागकेसर के चूर्ण का लगातार 7 दिन सेवन करने से संतान पुत्र उत्पन्न होता है ।
14. सवि का भात और मुंग की दाल खाने से बांझ पन दूर होता है और पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है ।
15. गर्भ का जब तीसरा महीना चल रहा हो तो गर्भवती स्त्री को शनिवार को थोडा सा जायफल और गुड़ मिलाकर खिलाने से अवश्य ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी ।
16. पुराने चावल को धोकर भिगो दें बनाने से पहले उसके पानी को अलग करके उसमें नीबूं की जड़ को महीन पीसकर उस पानी को स्त्री पी कर अपने पति से सम्बन्ध बनाये वह स्त्री कन्या को जन्म देगी ।

Wednesday, 12 February 2014

कोर्ट कचहरी के चक्कर से बचा लेंगे ये उपाय

जीवन में कई बार ऐसे हालत बन जाते हैं जब हमेंकोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। कोर्टकचहरी में चलने वाले मुकदमें बहुत लम्बे चलते हैं।कई बार तो यह एक पीढ़ी से लेकर
दूसरी पीढ़ी तक चलते हैं।ज्योतिष के मतानुसार विभिन्न ग्रह योगों औरउनकी स्थिति के मुताबिक ही हमें शुभ-अशुभ फल प्राप्त होते हैं।यदि किसी व्यक्ति की कुंडली मेंकोई अशुभ ग्रह योग हो तो उसे मुकदमें के दौरान बहुतसी परेशानियों को सहन करना पड़ता है। इन बुरे प्रभावों से बचने के लिए निम्न उपाय करें
1 ....कोर्ट जाते समय चावल के कुछ दानें अपने साथ ले जाएं। जिस कमरेमें आपके मुकदमे की कार्यवाही चल
रही हो उन चावलों को उस कमरे के बाहर फेंक दें।ध्यान रखें की आपको चावल ले जाते हुए अथवा कोर्ट में
फेंकते हुए कोई देखें नहीं। इस उपाय को गुप्त रूप से करें।
2 ....श्री हनुमान जी का पर्वत उठाए हुए चित्र अथवा श्री स्वरूप के सामने शुक्ल पक्ष केमंगलवार को निम्नलिखित चौपाई का रूद्राक्ष की माला से प्रतिदिन दो माला जाप करें। ऐसा करने से मुक़दमे में विजय के साथ साथ सभी क्लेशों का नाश होगा।
‘पवन तनय बल पवन समाना
बुद्धि विवेक विग्यान निधाना।
कवन सो काज कठिन जग माहि
जो नहि होई तात तुम पाहिं।
3 ....पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवाएं और उस मुहूर्त में श्री कार्य सिद्धि यन्त्र खरीद कर घर ले आएं। भोजपत्र पर किसी बारीक तीले से लाल चन्दन को स्याही का रूप देते हुए अपनी मनोकामना लिखें। गुलाब की खुशबू से र्निमित ग्यारह अगरबत्तियां लेकर आरती करें और कोई शुभ काम करने का संकल्प लें। मनोकामना लिखित भोज पत्र को चार तह बनानें के उपरांत कार्यसिद्धि यन्त्र के नीचे रख दें और प्रतिदिन गुलाब की खुशबू से र्निमित पांच अगरबत्तियां लेकर 21 बार अपनी मनोकामना का उच्चारण मन ही मन करें। फिर उन अगरबत्तियों को घर के मुख्य द्वार पर लगा दें।

Tuesday, 11 February 2014

अंकों का जीवन में प्रभाव

प्रत्येक अंक किसी न किसी ग्रह से अभिभूत होता है, 'अंक ज्योतिष' शब्द, अंक और ज्योतिष के योग से बना है। अर्थात् ऐसा विज्ञान जिसके द्वारा अंकों का प्रयोग ज्योतिष के साथ संबद्ध करके प्रयोग किया जा सके उसे अंक ज्योतिष कहेंगे।
अंक 1 से 9 तक होते हैं जबकि ज्योतिष में मूल रूप से तीन तत्व हैं- ग्रह, राशि और नक्षत्र। ग्रह 9 राशियां 12 और नक्षत्र 27 होते हैं।
अर्थात् नौ अंकों का संबंध 9 ग्रहों 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के साथ करना होता है।
ज्योतिष का क्षेत्र तो काफी विस्तृत है। परंतु अंक शास्त्र का क्षेत्र ज्योतिष की तुलना में सीमित है।
अंक ज्योतिष में 3 प्रकार के अंकों का प्रयोग किया जाता है वे हैं-
1. मूलांक, 2. भाग्यांक 3. नामांक किसी जातक के बारे में जानने के लिये सर्वप्रथम जातक की जन्म तिथि और नाम मालूम होना चाहिए। जन्म तिथि के आधार पर जातक का मूलांक और भाग्यांक ज्ञात कर सकते हैं। जन्म तिथि में से यदि सिर्फ तिथि के अंकों को जोड़ दिया जाये तो मूलांक ज्ञात होगा जैसे
11-12 -2013 में मूलांक हेतु '11' में 1+1 = 2 अर्थात मूलांक '2' होगा।
अब भाग्यांक निकालने के लिये जन्मतिथि को माह व वर्ष के साथ जोड़ना होगा। अर्थात् 1+1+1+2+ 2+1+3 = 11 = 1+1 = 2 अर्थात इस जातक का मूलांक 2 एवं भाग्यांक '2' है।
1-1-2014 जनवरी महीने का कुल योग 9 है अर्थात इसका स्वामी मंगल है , 2014 का कुल योग है 7 जिसका स्वामी केतु है .
जानिए अपने अंको के मित्र और शत्रु अंक :-

1.मूलांक 1 (जन्म दिनाँक 1,10,19,28) :
स्वामी सूर्य है. मित्र मूलाँक 2,3,5.

2. मूलांक 2 (जन्म दिनाँक 2,11,20,29)
स्वामी चन्द्र है.मित्र मूलाँक 1,3,5,6,8.

3.मूलांक 3 (जन्म दिनाँक 3,12,21,30)
आपका स्वामी गुरु है. मित्र मूलाँक 1,2,8,9.

4. मूलांक 4 (जन्म दिनाँक 4,13,22,31)
आपका स्वामी राहु है. मित्र मूलाँक 3,5,6,7.

5. मूलांक 5 (जन्म दिनाँक 5,14,23)
आपका स्वामी बुध है. मित्र मूलाँक 1,2,5,6.

6.मूलांक 6 (जन्म दिनाँक 6,15,24)
आपका स्वामी शुक्र है. मित्र मूलाँक 1,2,3,5,8.

7. मूलांक 7 (जन्म दिनाँक 7,16,25)
आपका स्वामी केतु है. मित्र मूलाँक 2,3,4,5.

8. मूलांक 8 (जन्म दिनाँक 8,17,26)
आपका स्वामी शनि है. मित्र मूलाँक 3,6,9.

9.मूलांक 9 (जन्म दिनाँक 9,18,27)
आपका स्वामी मंगल है. मित्र मूलाँक 1,2,3,8.

मूलांक 1: मूलांक 1 वाले लोग अधिकतर सहिष्णु, सहनशील एवं गंभीर होते हैं। इनके जीवन में निरंतर उत्थान-पतन होते रहते हैं। उनका जीवन संघर्षपूर्ण होता है। ऐसे लोगों में नेतृत्व की भी भावना प्रबल होती है। ये जिस कार्य को अपने हाथ में लेते हैं, उसे अच्छी तरह निभाने एवं संपन्न करने का सामथ्र्य भी रखते हैं। नित नए लोगों से संपर्क स्थापित करना ऐसे लोगों के व्यक्तित्व की विशेषता होती है। इनका परिचय क्षेत्र विस्तृत होता है तथा ये नवीनता की खोज में लगे रहते हैं। शारीरिक रूप से ऐसे लोग हृष्टपुष्ट एवं स्वस्थ होते हैं। इस अंक से संबधित लोग यदि नौकरी पेशा हों तो उच्च पद प्राप्त करने के प्रति चेष्टारत रहते हैं। अगर ये व्यापारी हों तो दिन-रात परिश्रम कर व्यापारी वर्ग में प्रमुख स्थान बना सकते हैं। ये निर्णय लेने में बहुत ही चतुर होते हैं। ये हमेशा समाज और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन लाने के प्रयास में रहते हैं। ये घिसी-पिटी लीक पर चलने के अभ्यस्त नहीं होते। ये अपने कार्य और अपनी धुन में ही मस्त रहते हैं। कार्य के बीच में टोका-टाकी उन्हें पसंद नहीं होती है। इनके विचार मौलिक होते हैं और कल्पनाशक्ति प्रबल होती है। विशेष: इनके लिए शुभ रत्न माणिक्य है और सूर्य इनके प्रधान देवता हैं।

मूलांक: मूलांक 2 से संबंधित लोग अत्यंत कल्पनाशील, भावुक, सहृदय और सरलचित्त होते हैं। ये न तो अधिक समय तक एक ही कार्य पर स्थिर रह सकते हैं और न ही लंबे समय तक सोच सकते हैं। इनके मन में नित नए नए विचार आते रहते हैं जिन्हें साकार देने के लिए ये सतत प्रयासरत रहते हैं। शारीरिक रूप से ऐसे लोग बलवान नहीं होते। ये मूलतः बुद्धिजीवी होते हैं। ये मस्तिष्क के स्तर अधिक सबल एवं स्वस्थ होते हैं, किंतु आत्मविश्वास की उनमें कमी रहती है, फलस्वरूप ये तुरंत कोई निर्णय नहीं ले पाते। सौंदर्य के प्रति इनकी रुचि परिष्कृत होती है। प्रेम और सौंदर्य के क्षेत्र में ये महारथी कहे जा सकते हैं। दूसरों को सम्मोहित करने की कला में ये प्रवीण होते हैं। अपरिचित से अपरिचित व्यक्ति को परिचित बना लेना इनके बाएं हाथ का खेल होता है। स्वभाव से शंकालु होते हुए भी ये दूसरों के हित का पूरा ख्याल रखते हैं। किसी को सीधे ना कहना इनके स्वभाव में नहीं होता। दूसरों के मन की बात जान लेने में ये प्रवीण होते हैं। ललित कलाओं में इनकी रुचि जन्मजात होती है। विशेष: इनके लिए मोती शुभ है और चंद्र इनके देवता हैं।

मूलांक 3: यह साहस, शक्ति एवं दृढता का अंक है। यह अंक श्रम तथा संघर्ष का परिचायक है। इस अंक से प्रभावित लोगों को पग-पग पर संघर्ष करना पड़ता है। स्वार्थ भावना इनमें कुछ विशेष ही पाई जाती है। काम पड़ने पर ये विरोधी से घुल-मिल जाते हैं और काम निकल जाने पर उसे दूर करने में भी देर नहीं लगाते। विचारों को व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त करने में ये कुशल होते हैं। किंतु धन संचय इनके लिए कठिन होता है। परिश्रम करके कमाने में ये दिन-रात लगे रहते हैं, पर जो कुछ कमाते हैं, व्यय हो जाता है। इस अंक के जातक बुद्धिमान, ईमानदार और उदार होते हैं, पर कोई ऊंचा पद या प्रमुख स्थान मिलने पर हो जाते हैं। मूलांक तीन के जातक अति महत्वाकांक्षी होते हैं। वे शीघ्रातिशीघ्र उन्नति के शिखर पर पहुंच जाना चाहते हंै। छोटा कद, छोटा कोष एवं छोटा कार्य इन्हें पसंद नहीं होता है। विशेष: इनके लिए पुखराज शुभ है और इनके देवता विष्णु हैं।

मूलांक 4 : यह मूलांक विशेषतः उथल-पुथल से संबंधित है। इस अंक से प्रभावित लोग जीवन में शांत बनकर बैठे रहें, यह संभव ही नहीं है। ये सतत क्रियाशील रहते हैं। इन्हें पग-पग पर भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इनकी भाग्योन्नति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। स्वभाव से ये बड़े क्रोधी एवं तुनकमिजाज होते हैं। इनकी इच्छा के प्रतिकूल कार्य होने पर ये आपे से बाहर हो जाते हैं, लेकिन जिस गति से क्रोध चढ़ता है, उसी गति से उतर भी जाता है। ऐसे लोग अपनी गुप्त बातों को मन में दबाकर रखते हैं। इनके मन में क्या योजना है या अगले क्षण ये क्या कदम उठाने जा रहे हैं, इसकी भनक तब तक किसी को नहीं होती, जब तक ये योजना को क्रियान्वित न कर लें। इस अंक से प्रभावित लोगों के जीवन में शत्रुओं की कमी नहीं रहती । ये एक शत्रु को परास्त करें तो दस नए शत्रु पैदा हो जाते हैं। यद्यपि इनकी पीठ पीछे शत्रु षड्यंत्र करते हैं, पर सामने कुछ भी नहीं कर पाते। विशेष: इनके लिए नीलम शुभ है और भैरव इनके आराध्य देव हैं।

मूलांक 5: मूलांक 5 के जातक नई से नई युक्तियों, नए से नए विचारों एवं सर्वथा नूतन तर्कों से अनुप्राणित रहते हैं। ये पूर्णतः क्रियाशील रहते हैं, झुकते नहीं, झुकाने में विश्वास रखते हैं। दूसरों को सम्मोहित करना ऐसे लोगों का सबसे बड़ा गुण है। कुछ ही क्षणों की बातचीत में ये दूसरों को अपना बना लेते हैं। यात्राएं इनके जीवन का विशेष अंग होती हैं, परंतु ये अपने कार्य में इतने व्यस्त रहते हैं कि चाह कर भी यात्रा के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। कार्य के प्रति एकाग्रता इनकी दूसरी विशेषता है। ये जो भी कार्य हाथ में लेते हैं, उसे किए बिना नहीं छोड़ते। ऐसे लोग अपने आपको स्थिति के अनुसार ढाल लेते हंै और विभिन्न स्रोंतों से धनोपार्जन करते हैं। विशेष: इनकी आराध्या लक्ष्मी हैं और हीरा इनके लिए शुभ है।

मूलांक 6: यह एक अत्यंत शुभ अंक है। इससे प्रभावित जातक दीर्घायु, स्वस्थ, बलवान, हंसमुख होते हैं। दूसरों को सम्मोहित करने का गुण जितना मूलांक 6 में होता है, उतना अन्य किसी भी मूलांक में नहीं होता। इस अंक से प्रभावित जातक रति क्रीड़ा में चतुर होते हैं। विपरीत लिंगी व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करने में ये दक्ष होते हैं। ये शीघ्र ही घुल-मिल जाने वाले होते हैं। ये कलाप्रेमी होते हैं और इनमें सौंदर्य के प्रति आकर्षण होता है। अव्यवस्था, गंदगी, फूहड़पन एवं असभ्यता से इन्हें चिढ़ होती है। इनमें सुरुचिपूर्ण एवं सलीकेदार कपड़े पहनने एवं बन-ठनकर रहने की प्रवृत्ति गहरी होती है। भौतिक सुखों में पूर्णतः आस्था रखते हुए ऐसे व्यक्ति जीवन का सही आनंद उठाते हैं। धन का अभाव रहते हुए भी ये मुक्तहस्त से व्यय करते हैं। जनता में शीघ्र ही लोकप्रिय हो जाते हैं तथा सांसारिक होते हुए भी हृदय से उदार एवं नीतिज्ञ होते हैं। विशेष: शुभ रत्न हीरा और शुभ वार बुध और शुक्र हैं।

मूलांक 7: मूलांक 7 सौहार्द्र, सहिष्णु, एवं सहयोगी भावना का प्रतीक है। इस अंक से प्रभावित लोगों में मूलतः तीन विशिष्ट गुण होते हैं- मौलिकता, स्वतंत्र विचार शक्ति एवं विशाल व्यक्तित्व। ऐसे लोग अपनी प्रतिभा के बल पर उच्च स्थान प्राप्त करते हंै। इन्हें मित्रों और सहयोगियों से भरपूर प्यार मिलता है और जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती है। साहसिक प्रकृति के होने के कारण कुछ ऐसा कर गुजरने को आतुर रहते हैं जो उसे प्रसिद्ध बना दे। विशेष: इनके लिए लहसुनिया शुभ है और नृसिंह इनके आराध्य हैं।

मूलांक 8: अंक ज्योतिष में इस अंक को ‘विश्वास का अंक’ कहा गया है। इसका स्वामी शनि है। इस अंक से प्रभावित लोगों का व्यवहार सहयोगपूर्ण होता है। ये अपने मित्रों और सहयोगियों की यथा शक्ति सहायता करते रहते हैं। ये दूसरों की रक्षा ढाल बनकर करते रहते हैं और विशाल वट वृक्ष की तरह अपनी शीतल छाया से उन्हें सुख पहुंचाते रहते हैं, परंतु जब ये किसी पर क्रुद्ध होते हैं तब प्रचंड रूप धारण कर लेते हैं। इन्हें फूहड़पन पसंद नहीं होता। अश्लील या गंदा मजाक सहन नहीं करते। इनमें दिखावा न के बराबर होता है। सबल, सजग व्यक्तित्व वाले ये लोग टूटते नहीं हैं। ये अंदर से सेवाभावी होते हैं। दूसरे लोगों को हर संभव प्रसन्न रखना या उनकी सेवा करते रहना इनका स्वभाव होता है। विशेष: शुभ रत्न नीलम और आराध्य देवता शनि हैं।
मूलांक 9:

मूलांक 9 के लोग साहसी होते हैं। इनका साहस कभी-कभी इतना अधिक बढ़ जाता है कि दुस्साहस का रूप धारण कर लेता है। कई बार अनर्थ करवा डालता है, परंतु इस प्रकार से ये न तो पदच्युत होते हैं और न ही भयभीत ये दृढ़ निश्चयी एवं वीर होते हैं। ये चुनौती भरे कार्यों को करके अपना नाम अमर कर जाते हैं। ये बाहर से कठोर, किंतु अंदर से कोमल होते हैं। अनुशासन को जीवन में सर्वोपरि मानते हैं और जो भी कार्य शुरू करते हैं, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। इनका प्रधान ग्रह मंगल है, जो युद्ध का देवता है। इन्हें हारना पसंद नहीं होता। गृहस्थ जीवन में न्यूनाधिक रूप से विपरीतता बनी रहती है। ऐसे व्यक्ति यदि अपने आप पर पूर्ण नियंत्रण रखें तो निश्चय ही सफल एवं श्रेष्ठ हो सकते हंै। विशेष: शुभ रत्न मूंगा और आराध्य हनुमान जी हैं।

Saturday, 18 January 2014

क्यों काम नहीं करते है ज्योतिष के कोई भी उपाय...............

अक्सर यह सुनने को मिलता है की उपाय काम नहीं करते या बहुत से उपाय किये किन्तु कोई परिणाम या परिवर्तन नहीं हुआ और परेशानी यथावत है ,बहुत से लोग इसलिए यहभी कहते मिलते है की भाग्य में लिखा कोईनहीं बदल सकता है ,कोई कितने भी उपाय
करे ,,,,,
तो क्यों नहीं काम करते है येज्योतिषीय उपाय ,
ऐसा तो हो ही नहीं सकता किकिसी समस्या या ग्रह दशा के लिए कोई उपाय ऋषियों -गुरुओ ने बनाया है तो उसमे कोई कारण
नहीं होगा ,,,जब ग्रह समस्या उत्पन्न करते हैतो उनके प्रभाव को कम करने का उपाय भी प्रकृति मेंउपलब्ध जरूर होगा ,समस्या और निदान दोनों प्रकृति मेंहमेशा ही रहते है ,यह प्रकृति के संतुलन के लिएभी तो आवश्यकहै ,,इसी की खोज करके ऋषियों ने यहउपाय बताए है ,,तब यह क्यों कहा जाता है की उपायकाम नहीं कर रहे ,कमी कहा है ,उपायकरने वाले में या बताने वाले में या खोज और परिकल्पना करनेवालेमें ,...........................................................उपाय कई तरह के होते है ,,रत्न धारण करना ,दानकरना ,वस्तु प्रवाहित करना ,मंत्र जप -पूजा -अनुष्ठान ,रंगों -वस्त्रों का उपयोग -अनुपयोग,वनस्पतियों को धारण करना ,विशिष्टपदार्थो का हवन आदि मुख्य रूप से उपायों के रूप में बताए जातेहै ,,इनके रत्नों का प्रभाव असंदिग्ध है ,रत्न वातावरण सेसम्बंधित ग्रह कए रंग और प्रकाश किरणों को अवशोषित
या परावर्तित करते है ,ये त्वचा कए संपर्क में रहकर सम्बंधित विशिष्ट उर्जा को शरीर में प्रवेश देते है ,जिससेसम्बंधित ग्रह की रश्मियों का प्रभाव शरीरमें बढ़ जाता है और तदनुरूप रासायनिक परिवर्तन शरीरमें होने से व्यक्ति के सोचने और कार्य करनेकी दिशा कए साथही क्षमता भी बदलजाती है ,जिससे वह सम्बंधित क्षेत्र में अग्रसरहो सफल हो पाता है ,,अब यहाँ यह भी होता है की रत्न जो उपयोग में लिया जा रहा है वह ही नकली हो ,या उसकी बनावटमें खराबी हो ,टुटा या दाग धब्बे युक्त हो ,या गलतस्थान पर गलत धातु के साथ पहन लिया गया हो ,तो वह कामनहीं करेगा या नुक्सान भी कर सकता है ,...........................................................
..दूसरा मुख्य उपाय दान करना बताया जाता है ,,दान एक पूर्णभावनात्मक उपाय है ,दान करने या वस्तु प्रवाहित करने मेंसामान्यतया यह किया जाता है की बताईगयी वस्तु उठाई औरजो भी अपनी समझ से जरूरतमंद दिखा या जाति विशेष का व्यक्ति दिखा दान दे दिया ,यह तो दान है ही नहीं ,अब परिणाम कैसे मिलेगा ,दान करने से पूर्व मन में भावना होनी चाहिएकी में यह वस्तु दान में दे रहा हूँ तो इससे उस जरूरतमंद व्यक्ति जिसे यह दान दिया जा रहा हैकी जरूरते पूरी होगी और वहआशीर्वाद देगा ,,आप केवल वस्तु का चयन कर सकते
है अपने अनुसार देते समय ,भावना भी उससेजुडी हो ,इसमें सबसे मुख्या है सुपात्र का चयन जिसेआप दान दे रहे है ,दान लेनेवाला यदि आपके दान से प्राप्त वस्तुसे शराब पिता है ,मांसाहार करता है ,उसका गलत उपयोग करता हैतो आप उसके पाप में भागीदार हो जाते है और आपकेदान का उपाय आपका ही नुक्सान कर सकता है ,,दानलेने वाला व्यक्ति यदि कुकर्मी है ,गलत हैमद्य ,मांसाहारी है ,पापी है तो तो उसकेमष्तिष्क से उत्पन्न तरंगे भी नकारात्मकउर्जा वाली होगी औरउसका दिया आशीर्वाद आपके भाग्य में सकारात्मकउर्जा का संचार नहीं करसकता ,,,इसी प्रकार जब आप वस्तु का दान देते हैतो वस्तु से सम्बंधित ग्रह रश्मियों की अधिकता आपकेशरीर से वास्तु में आपकी भावना कए साथप्रवेश करती है और दान देने पर आपकेशरीर से दूर होती है जिससे उस ग्रहका प्रभाव कम होता है ...............................................सबसे महत्वपूर्णउपाय ग्रहों के लिए देवी-देवता या ग्रह का मंत्र जपबताया जाता है ,,जब व्यक्ति मंत्रजाप करता है तब मंत्र कएध्वनि नादों से उर्जा उत्पन्न होती है जो वातावरणकी सम्बंधित क्षेत्र की उर्जा से संपर्ककरने कए साथ ही शरीर में स्थित उसमंत्र से सम्बंधित विशिष्ट चक्र को प्रभावितकरती है ,मंत्र जप कए समयव्यक्ति की एकाग्रता ,तल्लीनता ,भावना सेमानसिक तरंगे तीब्रता से निकलती है औरप्रकृति में उपस्थित उसीप्रकारकी तरंगों को आकर्षित करती है जिससेउर्जा की मात्रा व्यक्ति कए शरीर और
आसपास कए वातावरण में बढ़ जाती है और ग्रहका प्रभाव काम हो जाता है या अधिक हो जाता है या संतुलितहो जाता है ,[यह मंत्र की प्रकृति पर निर्भरहोता है ],अब मंत्र जप के समय यदि यंत्रवत सपाट स्वरों में जप हो ,और मन इधर-उधर भागता रहे ,मष्तिष्क एकाग्र न हो ,इष्ट या मंत्र का  आराध्य में विश्वास न हो ,भावना इष्ट या लक्ष्य से न जुडी हो ,संदेह हो की पता नहीं कामहोगा या नहीं ,तो मंत्र जप से कोई उर्जा प्राप्तनहीं होगी ,आपके मस्तिस्क  से कोई उर्जा उत्पन्न  नहीं होगी और प्रकृति से कोई उर्जा आकर्षित नहीं होगी ,फलतः मंत्र जप का उपाय कामनहीं कर पायेगा ,,,उपायों  का  कामनहीं करने का  मूल में यही कारण ,भावना , चयनआदि है ,,व्यक्ति की भावना ,विश्वास ,श्रद्धा ,सही  चयन ,सही पात्र का चयन उपायों में मुख्या होतेहै ,यह सही हो तो उपाय काम करते ही करते है
 
ये मेरा  व्यक्तिगत मत  है इसका कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है |