Wednesday, 12 February 2014

कोर्ट कचहरी के चक्कर से बचा लेंगे ये उपाय

जीवन में कई बार ऐसे हालत बन जाते हैं जब हमेंकोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। कोर्टकचहरी में चलने वाले मुकदमें बहुत लम्बे चलते हैं।कई बार तो यह एक पीढ़ी से लेकर
दूसरी पीढ़ी तक चलते हैं।ज्योतिष के मतानुसार विभिन्न ग्रह योगों औरउनकी स्थिति के मुताबिक ही हमें शुभ-अशुभ फल प्राप्त होते हैं।यदि किसी व्यक्ति की कुंडली मेंकोई अशुभ ग्रह योग हो तो उसे मुकदमें के दौरान बहुतसी परेशानियों को सहन करना पड़ता है। इन बुरे प्रभावों से बचने के लिए निम्न उपाय करें
1 ....कोर्ट जाते समय चावल के कुछ दानें अपने साथ ले जाएं। जिस कमरेमें आपके मुकदमे की कार्यवाही चल
रही हो उन चावलों को उस कमरे के बाहर फेंक दें।ध्यान रखें की आपको चावल ले जाते हुए अथवा कोर्ट में
फेंकते हुए कोई देखें नहीं। इस उपाय को गुप्त रूप से करें।
2 ....श्री हनुमान जी का पर्वत उठाए हुए चित्र अथवा श्री स्वरूप के सामने शुक्ल पक्ष केमंगलवार को निम्नलिखित चौपाई का रूद्राक्ष की माला से प्रतिदिन दो माला जाप करें। ऐसा करने से मुक़दमे में विजय के साथ साथ सभी क्लेशों का नाश होगा।
‘पवन तनय बल पवन समाना
बुद्धि विवेक विग्यान निधाना।
कवन सो काज कठिन जग माहि
जो नहि होई तात तुम पाहिं।
3 ....पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवाएं और उस मुहूर्त में श्री कार्य सिद्धि यन्त्र खरीद कर घर ले आएं। भोजपत्र पर किसी बारीक तीले से लाल चन्दन को स्याही का रूप देते हुए अपनी मनोकामना लिखें। गुलाब की खुशबू से र्निमित ग्यारह अगरबत्तियां लेकर आरती करें और कोई शुभ काम करने का संकल्प लें। मनोकामना लिखित भोज पत्र को चार तह बनानें के उपरांत कार्यसिद्धि यन्त्र के नीचे रख दें और प्रतिदिन गुलाब की खुशबू से र्निमित पांच अगरबत्तियां लेकर 21 बार अपनी मनोकामना का उच्चारण मन ही मन करें। फिर उन अगरबत्तियों को घर के मुख्य द्वार पर लगा दें।

Tuesday, 11 February 2014

अंकों का जीवन में प्रभाव

प्रत्येक अंक किसी न किसी ग्रह से अभिभूत होता है, 'अंक ज्योतिष' शब्द, अंक और ज्योतिष के योग से बना है। अर्थात् ऐसा विज्ञान जिसके द्वारा अंकों का प्रयोग ज्योतिष के साथ संबद्ध करके प्रयोग किया जा सके उसे अंक ज्योतिष कहेंगे।
अंक 1 से 9 तक होते हैं जबकि ज्योतिष में मूल रूप से तीन तत्व हैं- ग्रह, राशि और नक्षत्र। ग्रह 9 राशियां 12 और नक्षत्र 27 होते हैं।
अर्थात् नौ अंकों का संबंध 9 ग्रहों 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के साथ करना होता है।
ज्योतिष का क्षेत्र तो काफी विस्तृत है। परंतु अंक शास्त्र का क्षेत्र ज्योतिष की तुलना में सीमित है।
अंक ज्योतिष में 3 प्रकार के अंकों का प्रयोग किया जाता है वे हैं-
1. मूलांक, 2. भाग्यांक 3. नामांक किसी जातक के बारे में जानने के लिये सर्वप्रथम जातक की जन्म तिथि और नाम मालूम होना चाहिए। जन्म तिथि के आधार पर जातक का मूलांक और भाग्यांक ज्ञात कर सकते हैं। जन्म तिथि में से यदि सिर्फ तिथि के अंकों को जोड़ दिया जाये तो मूलांक ज्ञात होगा जैसे
11-12 -2013 में मूलांक हेतु '11' में 1+1 = 2 अर्थात मूलांक '2' होगा।
अब भाग्यांक निकालने के लिये जन्मतिथि को माह व वर्ष के साथ जोड़ना होगा। अर्थात् 1+1+1+2+ 2+1+3 = 11 = 1+1 = 2 अर्थात इस जातक का मूलांक 2 एवं भाग्यांक '2' है।
1-1-2014 जनवरी महीने का कुल योग 9 है अर्थात इसका स्वामी मंगल है , 2014 का कुल योग है 7 जिसका स्वामी केतु है .
जानिए अपने अंको के मित्र और शत्रु अंक :-

1.मूलांक 1 (जन्म दिनाँक 1,10,19,28) :
स्वामी सूर्य है. मित्र मूलाँक 2,3,5.

2. मूलांक 2 (जन्म दिनाँक 2,11,20,29)
स्वामी चन्द्र है.मित्र मूलाँक 1,3,5,6,8.

3.मूलांक 3 (जन्म दिनाँक 3,12,21,30)
आपका स्वामी गुरु है. मित्र मूलाँक 1,2,8,9.

4. मूलांक 4 (जन्म दिनाँक 4,13,22,31)
आपका स्वामी राहु है. मित्र मूलाँक 3,5,6,7.

5. मूलांक 5 (जन्म दिनाँक 5,14,23)
आपका स्वामी बुध है. मित्र मूलाँक 1,2,5,6.

6.मूलांक 6 (जन्म दिनाँक 6,15,24)
आपका स्वामी शुक्र है. मित्र मूलाँक 1,2,3,5,8.

7. मूलांक 7 (जन्म दिनाँक 7,16,25)
आपका स्वामी केतु है. मित्र मूलाँक 2,3,4,5.

8. मूलांक 8 (जन्म दिनाँक 8,17,26)
आपका स्वामी शनि है. मित्र मूलाँक 3,6,9.

9.मूलांक 9 (जन्म दिनाँक 9,18,27)
आपका स्वामी मंगल है. मित्र मूलाँक 1,2,3,8.

मूलांक 1: मूलांक 1 वाले लोग अधिकतर सहिष्णु, सहनशील एवं गंभीर होते हैं। इनके जीवन में निरंतर उत्थान-पतन होते रहते हैं। उनका जीवन संघर्षपूर्ण होता है। ऐसे लोगों में नेतृत्व की भी भावना प्रबल होती है। ये जिस कार्य को अपने हाथ में लेते हैं, उसे अच्छी तरह निभाने एवं संपन्न करने का सामथ्र्य भी रखते हैं। नित नए लोगों से संपर्क स्थापित करना ऐसे लोगों के व्यक्तित्व की विशेषता होती है। इनका परिचय क्षेत्र विस्तृत होता है तथा ये नवीनता की खोज में लगे रहते हैं। शारीरिक रूप से ऐसे लोग हृष्टपुष्ट एवं स्वस्थ होते हैं। इस अंक से संबधित लोग यदि नौकरी पेशा हों तो उच्च पद प्राप्त करने के प्रति चेष्टारत रहते हैं। अगर ये व्यापारी हों तो दिन-रात परिश्रम कर व्यापारी वर्ग में प्रमुख स्थान बना सकते हैं। ये निर्णय लेने में बहुत ही चतुर होते हैं। ये हमेशा समाज और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन लाने के प्रयास में रहते हैं। ये घिसी-पिटी लीक पर चलने के अभ्यस्त नहीं होते। ये अपने कार्य और अपनी धुन में ही मस्त रहते हैं। कार्य के बीच में टोका-टाकी उन्हें पसंद नहीं होती है। इनके विचार मौलिक होते हैं और कल्पनाशक्ति प्रबल होती है। विशेष: इनके लिए शुभ रत्न माणिक्य है और सूर्य इनके प्रधान देवता हैं।

मूलांक: मूलांक 2 से संबंधित लोग अत्यंत कल्पनाशील, भावुक, सहृदय और सरलचित्त होते हैं। ये न तो अधिक समय तक एक ही कार्य पर स्थिर रह सकते हैं और न ही लंबे समय तक सोच सकते हैं। इनके मन में नित नए नए विचार आते रहते हैं जिन्हें साकार देने के लिए ये सतत प्रयासरत रहते हैं। शारीरिक रूप से ऐसे लोग बलवान नहीं होते। ये मूलतः बुद्धिजीवी होते हैं। ये मस्तिष्क के स्तर अधिक सबल एवं स्वस्थ होते हैं, किंतु आत्मविश्वास की उनमें कमी रहती है, फलस्वरूप ये तुरंत कोई निर्णय नहीं ले पाते। सौंदर्य के प्रति इनकी रुचि परिष्कृत होती है। प्रेम और सौंदर्य के क्षेत्र में ये महारथी कहे जा सकते हैं। दूसरों को सम्मोहित करने की कला में ये प्रवीण होते हैं। अपरिचित से अपरिचित व्यक्ति को परिचित बना लेना इनके बाएं हाथ का खेल होता है। स्वभाव से शंकालु होते हुए भी ये दूसरों के हित का पूरा ख्याल रखते हैं। किसी को सीधे ना कहना इनके स्वभाव में नहीं होता। दूसरों के मन की बात जान लेने में ये प्रवीण होते हैं। ललित कलाओं में इनकी रुचि जन्मजात होती है। विशेष: इनके लिए मोती शुभ है और चंद्र इनके देवता हैं।

मूलांक 3: यह साहस, शक्ति एवं दृढता का अंक है। यह अंक श्रम तथा संघर्ष का परिचायक है। इस अंक से प्रभावित लोगों को पग-पग पर संघर्ष करना पड़ता है। स्वार्थ भावना इनमें कुछ विशेष ही पाई जाती है। काम पड़ने पर ये विरोधी से घुल-मिल जाते हैं और काम निकल जाने पर उसे दूर करने में भी देर नहीं लगाते। विचारों को व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त करने में ये कुशल होते हैं। किंतु धन संचय इनके लिए कठिन होता है। परिश्रम करके कमाने में ये दिन-रात लगे रहते हैं, पर जो कुछ कमाते हैं, व्यय हो जाता है। इस अंक के जातक बुद्धिमान, ईमानदार और उदार होते हैं, पर कोई ऊंचा पद या प्रमुख स्थान मिलने पर हो जाते हैं। मूलांक तीन के जातक अति महत्वाकांक्षी होते हैं। वे शीघ्रातिशीघ्र उन्नति के शिखर पर पहुंच जाना चाहते हंै। छोटा कद, छोटा कोष एवं छोटा कार्य इन्हें पसंद नहीं होता है। विशेष: इनके लिए पुखराज शुभ है और इनके देवता विष्णु हैं।

मूलांक 4 : यह मूलांक विशेषतः उथल-पुथल से संबंधित है। इस अंक से प्रभावित लोग जीवन में शांत बनकर बैठे रहें, यह संभव ही नहीं है। ये सतत क्रियाशील रहते हैं। इन्हें पग-पग पर भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इनकी भाग्योन्नति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। स्वभाव से ये बड़े क्रोधी एवं तुनकमिजाज होते हैं। इनकी इच्छा के प्रतिकूल कार्य होने पर ये आपे से बाहर हो जाते हैं, लेकिन जिस गति से क्रोध चढ़ता है, उसी गति से उतर भी जाता है। ऐसे लोग अपनी गुप्त बातों को मन में दबाकर रखते हैं। इनके मन में क्या योजना है या अगले क्षण ये क्या कदम उठाने जा रहे हैं, इसकी भनक तब तक किसी को नहीं होती, जब तक ये योजना को क्रियान्वित न कर लें। इस अंक से प्रभावित लोगों के जीवन में शत्रुओं की कमी नहीं रहती । ये एक शत्रु को परास्त करें तो दस नए शत्रु पैदा हो जाते हैं। यद्यपि इनकी पीठ पीछे शत्रु षड्यंत्र करते हैं, पर सामने कुछ भी नहीं कर पाते। विशेष: इनके लिए नीलम शुभ है और भैरव इनके आराध्य देव हैं।

मूलांक 5: मूलांक 5 के जातक नई से नई युक्तियों, नए से नए विचारों एवं सर्वथा नूतन तर्कों से अनुप्राणित रहते हैं। ये पूर्णतः क्रियाशील रहते हैं, झुकते नहीं, झुकाने में विश्वास रखते हैं। दूसरों को सम्मोहित करना ऐसे लोगों का सबसे बड़ा गुण है। कुछ ही क्षणों की बातचीत में ये दूसरों को अपना बना लेते हैं। यात्राएं इनके जीवन का विशेष अंग होती हैं, परंतु ये अपने कार्य में इतने व्यस्त रहते हैं कि चाह कर भी यात्रा के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। कार्य के प्रति एकाग्रता इनकी दूसरी विशेषता है। ये जो भी कार्य हाथ में लेते हैं, उसे किए बिना नहीं छोड़ते। ऐसे लोग अपने आपको स्थिति के अनुसार ढाल लेते हंै और विभिन्न स्रोंतों से धनोपार्जन करते हैं। विशेष: इनकी आराध्या लक्ष्मी हैं और हीरा इनके लिए शुभ है।

मूलांक 6: यह एक अत्यंत शुभ अंक है। इससे प्रभावित जातक दीर्घायु, स्वस्थ, बलवान, हंसमुख होते हैं। दूसरों को सम्मोहित करने का गुण जितना मूलांक 6 में होता है, उतना अन्य किसी भी मूलांक में नहीं होता। इस अंक से प्रभावित जातक रति क्रीड़ा में चतुर होते हैं। विपरीत लिंगी व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करने में ये दक्ष होते हैं। ये शीघ्र ही घुल-मिल जाने वाले होते हैं। ये कलाप्रेमी होते हैं और इनमें सौंदर्य के प्रति आकर्षण होता है। अव्यवस्था, गंदगी, फूहड़पन एवं असभ्यता से इन्हें चिढ़ होती है। इनमें सुरुचिपूर्ण एवं सलीकेदार कपड़े पहनने एवं बन-ठनकर रहने की प्रवृत्ति गहरी होती है। भौतिक सुखों में पूर्णतः आस्था रखते हुए ऐसे व्यक्ति जीवन का सही आनंद उठाते हैं। धन का अभाव रहते हुए भी ये मुक्तहस्त से व्यय करते हैं। जनता में शीघ्र ही लोकप्रिय हो जाते हैं तथा सांसारिक होते हुए भी हृदय से उदार एवं नीतिज्ञ होते हैं। विशेष: शुभ रत्न हीरा और शुभ वार बुध और शुक्र हैं।

मूलांक 7: मूलांक 7 सौहार्द्र, सहिष्णु, एवं सहयोगी भावना का प्रतीक है। इस अंक से प्रभावित लोगों में मूलतः तीन विशिष्ट गुण होते हैं- मौलिकता, स्वतंत्र विचार शक्ति एवं विशाल व्यक्तित्व। ऐसे लोग अपनी प्रतिभा के बल पर उच्च स्थान प्राप्त करते हंै। इन्हें मित्रों और सहयोगियों से भरपूर प्यार मिलता है और जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती है। साहसिक प्रकृति के होने के कारण कुछ ऐसा कर गुजरने को आतुर रहते हैं जो उसे प्रसिद्ध बना दे। विशेष: इनके लिए लहसुनिया शुभ है और नृसिंह इनके आराध्य हैं।

मूलांक 8: अंक ज्योतिष में इस अंक को ‘विश्वास का अंक’ कहा गया है। इसका स्वामी शनि है। इस अंक से प्रभावित लोगों का व्यवहार सहयोगपूर्ण होता है। ये अपने मित्रों और सहयोगियों की यथा शक्ति सहायता करते रहते हैं। ये दूसरों की रक्षा ढाल बनकर करते रहते हैं और विशाल वट वृक्ष की तरह अपनी शीतल छाया से उन्हें सुख पहुंचाते रहते हैं, परंतु जब ये किसी पर क्रुद्ध होते हैं तब प्रचंड रूप धारण कर लेते हैं। इन्हें फूहड़पन पसंद नहीं होता। अश्लील या गंदा मजाक सहन नहीं करते। इनमें दिखावा न के बराबर होता है। सबल, सजग व्यक्तित्व वाले ये लोग टूटते नहीं हैं। ये अंदर से सेवाभावी होते हैं। दूसरे लोगों को हर संभव प्रसन्न रखना या उनकी सेवा करते रहना इनका स्वभाव होता है। विशेष: शुभ रत्न नीलम और आराध्य देवता शनि हैं।
मूलांक 9:

मूलांक 9 के लोग साहसी होते हैं। इनका साहस कभी-कभी इतना अधिक बढ़ जाता है कि दुस्साहस का रूप धारण कर लेता है। कई बार अनर्थ करवा डालता है, परंतु इस प्रकार से ये न तो पदच्युत होते हैं और न ही भयभीत ये दृढ़ निश्चयी एवं वीर होते हैं। ये चुनौती भरे कार्यों को करके अपना नाम अमर कर जाते हैं। ये बाहर से कठोर, किंतु अंदर से कोमल होते हैं। अनुशासन को जीवन में सर्वोपरि मानते हैं और जो भी कार्य शुरू करते हैं, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। इनका प्रधान ग्रह मंगल है, जो युद्ध का देवता है। इन्हें हारना पसंद नहीं होता। गृहस्थ जीवन में न्यूनाधिक रूप से विपरीतता बनी रहती है। ऐसे व्यक्ति यदि अपने आप पर पूर्ण नियंत्रण रखें तो निश्चय ही सफल एवं श्रेष्ठ हो सकते हंै। विशेष: शुभ रत्न मूंगा और आराध्य हनुमान जी हैं।

Saturday, 18 January 2014

क्यों काम नहीं करते है ज्योतिष के कोई भी उपाय...............

अक्सर यह सुनने को मिलता है की उपाय काम नहीं करते या बहुत से उपाय किये किन्तु कोई परिणाम या परिवर्तन नहीं हुआ और परेशानी यथावत है ,बहुत से लोग इसलिए यहभी कहते मिलते है की भाग्य में लिखा कोईनहीं बदल सकता है ,कोई कितने भी उपाय
करे ,,,,,
तो क्यों नहीं काम करते है येज्योतिषीय उपाय ,
ऐसा तो हो ही नहीं सकता किकिसी समस्या या ग्रह दशा के लिए कोई उपाय ऋषियों -गुरुओ ने बनाया है तो उसमे कोई कारण
नहीं होगा ,,,जब ग्रह समस्या उत्पन्न करते हैतो उनके प्रभाव को कम करने का उपाय भी प्रकृति मेंउपलब्ध जरूर होगा ,समस्या और निदान दोनों प्रकृति मेंहमेशा ही रहते है ,यह प्रकृति के संतुलन के लिएभी तो आवश्यकहै ,,इसी की खोज करके ऋषियों ने यहउपाय बताए है ,,तब यह क्यों कहा जाता है की उपायकाम नहीं कर रहे ,कमी कहा है ,उपायकरने वाले में या बताने वाले में या खोज और परिकल्पना करनेवालेमें ,...........................................................उपाय कई तरह के होते है ,,रत्न धारण करना ,दानकरना ,वस्तु प्रवाहित करना ,मंत्र जप -पूजा -अनुष्ठान ,रंगों -वस्त्रों का उपयोग -अनुपयोग,वनस्पतियों को धारण करना ,विशिष्टपदार्थो का हवन आदि मुख्य रूप से उपायों के रूप में बताए जातेहै ,,इनके रत्नों का प्रभाव असंदिग्ध है ,रत्न वातावरण सेसम्बंधित ग्रह कए रंग और प्रकाश किरणों को अवशोषित
या परावर्तित करते है ,ये त्वचा कए संपर्क में रहकर सम्बंधित विशिष्ट उर्जा को शरीर में प्रवेश देते है ,जिससेसम्बंधित ग्रह की रश्मियों का प्रभाव शरीरमें बढ़ जाता है और तदनुरूप रासायनिक परिवर्तन शरीरमें होने से व्यक्ति के सोचने और कार्य करनेकी दिशा कए साथही क्षमता भी बदलजाती है ,जिससे वह सम्बंधित क्षेत्र में अग्रसरहो सफल हो पाता है ,,अब यहाँ यह भी होता है की रत्न जो उपयोग में लिया जा रहा है वह ही नकली हो ,या उसकी बनावटमें खराबी हो ,टुटा या दाग धब्बे युक्त हो ,या गलतस्थान पर गलत धातु के साथ पहन लिया गया हो ,तो वह कामनहीं करेगा या नुक्सान भी कर सकता है ,...........................................................
..दूसरा मुख्य उपाय दान करना बताया जाता है ,,दान एक पूर्णभावनात्मक उपाय है ,दान करने या वस्तु प्रवाहित करने मेंसामान्यतया यह किया जाता है की बताईगयी वस्तु उठाई औरजो भी अपनी समझ से जरूरतमंद दिखा या जाति विशेष का व्यक्ति दिखा दान दे दिया ,यह तो दान है ही नहीं ,अब परिणाम कैसे मिलेगा ,दान करने से पूर्व मन में भावना होनी चाहिएकी में यह वस्तु दान में दे रहा हूँ तो इससे उस जरूरतमंद व्यक्ति जिसे यह दान दिया जा रहा हैकी जरूरते पूरी होगी और वहआशीर्वाद देगा ,,आप केवल वस्तु का चयन कर सकते
है अपने अनुसार देते समय ,भावना भी उससेजुडी हो ,इसमें सबसे मुख्या है सुपात्र का चयन जिसेआप दान दे रहे है ,दान लेनेवाला यदि आपके दान से प्राप्त वस्तुसे शराब पिता है ,मांसाहार करता है ,उसका गलत उपयोग करता हैतो आप उसके पाप में भागीदार हो जाते है और आपकेदान का उपाय आपका ही नुक्सान कर सकता है ,,दानलेने वाला व्यक्ति यदि कुकर्मी है ,गलत हैमद्य ,मांसाहारी है ,पापी है तो तो उसकेमष्तिष्क से उत्पन्न तरंगे भी नकारात्मकउर्जा वाली होगी औरउसका दिया आशीर्वाद आपके भाग्य में सकारात्मकउर्जा का संचार नहीं करसकता ,,,इसी प्रकार जब आप वस्तु का दान देते हैतो वस्तु से सम्बंधित ग्रह रश्मियों की अधिकता आपकेशरीर से वास्तु में आपकी भावना कए साथप्रवेश करती है और दान देने पर आपकेशरीर से दूर होती है जिससे उस ग्रहका प्रभाव कम होता है ...............................................सबसे महत्वपूर्णउपाय ग्रहों के लिए देवी-देवता या ग्रह का मंत्र जपबताया जाता है ,,जब व्यक्ति मंत्रजाप करता है तब मंत्र कएध्वनि नादों से उर्जा उत्पन्न होती है जो वातावरणकी सम्बंधित क्षेत्र की उर्जा से संपर्ककरने कए साथ ही शरीर में स्थित उसमंत्र से सम्बंधित विशिष्ट चक्र को प्रभावितकरती है ,मंत्र जप कए समयव्यक्ति की एकाग्रता ,तल्लीनता ,भावना सेमानसिक तरंगे तीब्रता से निकलती है औरप्रकृति में उपस्थित उसीप्रकारकी तरंगों को आकर्षित करती है जिससेउर्जा की मात्रा व्यक्ति कए शरीर और
आसपास कए वातावरण में बढ़ जाती है और ग्रहका प्रभाव काम हो जाता है या अधिक हो जाता है या संतुलितहो जाता है ,[यह मंत्र की प्रकृति पर निर्भरहोता है ],अब मंत्र जप के समय यदि यंत्रवत सपाट स्वरों में जप हो ,और मन इधर-उधर भागता रहे ,मष्तिष्क एकाग्र न हो ,इष्ट या मंत्र का  आराध्य में विश्वास न हो ,भावना इष्ट या लक्ष्य से न जुडी हो ,संदेह हो की पता नहीं कामहोगा या नहीं ,तो मंत्र जप से कोई उर्जा प्राप्तनहीं होगी ,आपके मस्तिस्क  से कोई उर्जा उत्पन्न  नहीं होगी और प्रकृति से कोई उर्जा आकर्षित नहीं होगी ,फलतः मंत्र जप का उपाय कामनहीं कर पायेगा ,,,उपायों  का  कामनहीं करने का  मूल में यही कारण ,भावना , चयनआदि है ,,व्यक्ति की भावना ,विश्वास ,श्रद्धा ,सही  चयन ,सही पात्र का चयन उपायों में मुख्या होतेहै ,यह सही हो तो उपाय काम करते ही करते है
 
ये मेरा  व्यक्तिगत मत  है इसका कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है |
 
 

Saturday, 11 January 2014

नए नेताओं और शासकों के उदय का साल होगा 2014!

1 जनवरी, 2014 की दस्तक पर शून्य बजकर शून्य मिनट पर जब कैलेंडर बदला तब मंगल बुध की राशि कन्या में, शनि देव मित्र राहू के साथ शुक्र की राशि तुला में, सूर्य और बुध की युति चंद्रमा के साथ बृहस्पति की राशि धनु में शुक्रदेव के वक्री होकर शनि की राशि मकर में, केतु मंगल की राशि मेष में और वक्री बृहस्पति बुध की राशि मिथुन में गतिशील हो गए।

विक्रम संवत 2070 में पराभव संवत्सर चल रहा है, इसके राजा बृहस्पति और मंत्री शनि हैं, 31 मार्च 2014 अर्थात् गुड़ीपाडवा से श्री संवत 2071 यानी 'प्लवंग' संवत्सर आरंभ होगा, जिसके राजा और मंत्री का पद चंद्रदेव के पास रहेगा ससेष बृहस्पति होंगे, दुर्गेष सूर्य, धनेश बुध, रसेश शनि, धान्येश मंगल, निरसेश बुध, फलेश सूर्य और मेधेश सूर्य होंगे। ग्रंथों के अनुसार 'प्लवंग' संवत्सर तमाम देशों में आपसी तनाव, द्वंद्व राजनेताओं में वैमनस्य और परिवर्तन के लिए जाना जाता है। चंद्रमा के राजा होने से प्रचुर मात्रा में वर्षा का योग है। यह वर्षा-बाढ़ का रूप भी ले सकती है।

किसी नए राजा, राजाओं या शासकों का उदय हो सकता है। जनता के रोग और दुख के शमन की योजनाएं बनेंगी। चंद्रदेव के मंत्री पद पर आसीन होने से अनाज की पर्याप्त पैदावार होगी, लेकिन मन के मालिक चंद्रदेव के मंत्री पद पर विराजमान होने के कारण यह वर्ष गलत राजनीतिक फैसलों के लिए भी याद किया जाएगा।
बृहस्पति के सयेश होने से रस वाले पदार्थों का उत्पादन अधिक होगा, मंगल के धनेश होने से मुनाफाखोरी बढ़ेगी। गेहूं, सरसों, मूंग, उड़द और तिल की कीमतों में तेजी होगी। जनता व्याकुल रहेगी, आम आदमी के हिस्से का आम कोई और खा जाएगा पब्लिक के हिस्से में केवल सूखी हुई गुठली ही आएगी यानी जनता इस बरस भी कष्ट में ही रहेगी।

सूर्य के मेधेश पद पर आसीन होने से फसलों के खराब होने के संकेत मिल रहे हैं। आतंकवादी घटनाएं सिर उठाएंगी, जन सामान्य में भय व्याप्त होगा। रसेश पद पर शनि के विराजमान होने से रसीले पदार्थों का उत्पादन होने के बाद भी उनके नाश का योग बनता है।

Saturday, 14 December 2013

दूकान की बिक्री तत्काल प्रभाव से बढ़ेगी

१.“श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दल निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नमः। लक्ष्मी माई, सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करो भलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई।”

विधि- घर से नहा-धोकर दुकान पर जाकर अगर-बत्ती जलाकर उसी से लक्ष्मी जी के चित्र की आरती करके, गद्दी पर बैठकर, १ माला उक्त मन्त्र की जपकर दुकान का लेन-देन प्रारम्भ करें। आशातीत लाभ होगा।

२.  “भँवरवीर, तू चेला मेरा। खोल दुकान कहा कर मेरा। उठे जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर सोखे नहिं जाए।।” 
विधि- १॰ किसीशुभ रविवार से उक्त मन्त्र की १० माला प्रतिदिन के नियम से दस दिनों में १०० माला जप कर लें। केवल रविवार के ही दिन इस मन्त्र का प्रयोग किया जाता है। प्रातः स्नान करके दुकान पर जाएँ। एक हाथ में थोड़े-से काले उड़द ले लें। फिर ११ बार मन्त्र पढ़कर, उन पर फूँक मारकर दुकान में चारों ओर बिखेर दें। सोमवार को प्रातः उन उड़दों को समेट कर किसी चौराहे पर, बिना किसी के टोके, डाल आएँ। इस प्रकार चार रविवार तक लगातार, बिना नागा किए, यह प्रयोग करें।

पारिवारिक अशान्ती, आपसी वैचारिक मतभेदो का हारक मन्त्र :-

कभी कभी ग्रह दोष अथवा अन्य किन्ही बाह्य या आन्तरिक कारणों के फलस्वरूप पति-पत्नि,पिता-पुत्र,भाई-भाई अथवा अन्य किन्ही सदस्यों के बीच आपसी मतभेद उत्पन होकर घर परिवार की शान्ती में विघ्न उत्पन हो जाता है। ओर ऎसा प्रतीत होता है कि जैसे सभी पारिवारिक सम्बंध बिगडते जा रहे हैं, जिनके कारण मन अशान्त एवं अधीर हो उठता है। हर समय कुछ अनिष्ट हो जाने का भय मन में बना रहता है। यहाँ मैं जो मन्त्र आपको बता रहा हूँ----ये जानिए कि ऎसी किसी भी स्थिति के उन्मूलन के लिए ये मन्त्र सचमुच रामबाण औषधि का कार्य करता है। ऎसा नहीं कि इसके लिए आपको कोई पूजा अनुष्ठान करना पडेगा या अन्य किसी प्रकार की कोई सामग्री, कोई माला इत्यादि की जरूरत पडेगी। न कोई पाठ पूजा, न सामग्री, न माला या अन्य कैसे भी नियम, विधि-विधान की कोई आवश्यकता नहीं और न ही समय का कोई निश्चित बन्धन। आप अपनी सुविधा अनुसार जैसा और जब, जितनी मात्रा में चाहें उतना जाप कर सकते हैं। बस मन्त्र एवं मिलने वाले उसके सुफल के बारे में श्रद्धा बनाए रखिए तो समझिए कुछ ही दिनों में आपको इसका प्रत्यक्ष लाभ दिखलाई पडने लगेगा। मन्त्र है :- ॐ क्लीं विघ्न क्लेश नाशाय हुँ फट.......................

दैनिक परेशानियों कुछ अचूक परखे हुए उपाय .....................................................

मनुष्य के जीवन में आए दिन परेशानियां आती रहती है। यदि कुछ साधारण तांत्रिक प्रयोग किए जाएं तो वह समस्याएं शीघ्र ही समाप्त भी हो जाती हैं। तांत्रिक प्रयोग में एक ऐसे पत्थर का उपयोग किया जाता है जो दिखने में साधारण होता है लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से अपना प्रभाव दिखाता है। उस पत्थर का नाम है गोमती चक्र। गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यों तथा असाध...्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। इसका तांत्रिक उपयोग बहुत ही सरल होता है। जैसे-
1- पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजाद कहकर फेंद दें, मतभेद समाप्त हो जाएगा।
2- पुत्र प्राप्ति के लिए पांच गोमती चक्र लेकर किसी नदी या तालाब में हिलि हिलि मिलि मिलि चिलि चिलि हुक पांच बोलकर विसर्जित करें, पुत्र प्राप्ति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
3- यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।
4- यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है।
5- यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र लेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़ दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे ..


बस ये याद रखे कि गोमती चक्र असली हो और जाग्रत किये हुए हो अन्यथा लाभ के स्थान पर हनी भी हो सकती है ...